प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना: महाराष्ट्र में 1472 करोड़ की परियोजनाओं को मंजूरी

Thu 12-Mar-2026,02:09 PM IST +05:30

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प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना: महाराष्ट्र में 1472 करोड़ की परियोजनाओं को मंजूरी PM-Matsya-Sampada-Yojana-Maharashtra-Fisheries-Projects
  • प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत महाराष्ट्र में 1472.75 करोड़ रुपये की परियोजनाओं को मंजूरी, समुद्री कृषि, सजावटी मछली पालन और पिंजरा पालन को मिलेगा बड़ा बढ़ावा।

  • तटीय क्षेत्रों में खुले समुद्री पिंजरा पालन, सजावटी मत्स्य पालन और मोती पालन जैसी गतिविधियों से मछुआरों की आय बढ़ाने और रोजगार सृजन पर सरकार का जोर।

Maharashtra / Nagpur :

महाराष्ट्र/ देश में मत्स्य उत्पादन बढ़ाने और मछुआरों की आय में वृद्धि के उद्देश्य से केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) के तहत महाराष्ट्र में बड़े स्तर पर परियोजनाएं लागू की जा रही हैं। मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के अंतर्गत मत्स्य पालन विभाग ने राज्य में मत्स्य विकास के लिए 1472.75 करोड़ रुपये की परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इन योजनाओं के माध्यम से समुद्री कृषि (मैरीकल्चर), सजावटी मछली पालन, मोती पालन और खुले समुद्री पिंजरा पालन जैसी गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है।

मत्स्य पालन विभाग (डीओएफ) देश के विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मत्स्य उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) का प्रभावी क्रियान्वयन कर रहा है। इस योजना के तहत समुद्री कृषि, सजावटी मछली पालन और मोती पालन जैसी गतिविधियों को प्राथमिकता दी गई है, जिससे मछुआरों और तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को अतिरिक्त आय के अवसर मिल सकें।

महाराष्ट्र में इस योजना के अंतर्गत पिछले पांच वर्षों और चालू वित्तीय वर्ष के दौरान कुल 1472.75 करोड़ रुपये की मत्स्य विकास परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इन परियोजनाओं का उद्देश्य राज्य के संभावित जिलों में मत्स्य उत्पादन बढ़ाना, आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा देना और रोजगार के नए अवसर तैयार करना है।

योजना के तहत कई महत्वपूर्ण गतिविधियों को स्वीकृति दी गई है। इनमें सजावटी मछली ब्रूड बैंक की एक इकाई, बैकयार्ड या मध्यम स्तर की सजावटी मछली पालन की 16 इकाइयां, एकीकृत सजावटी मछली पालन की 32 इकाइयां और मनोरंजक मत्स्य पालन की 13 इकाइयां शामिल हैं। इसके अलावा खुले समुद्री पिंजरा पालन की 110 इकाइयों को भी मंजूरी दी गई है, जो समुद्री मत्स्य उत्पादन को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

महाराष्ट्र सरकार के अनुसार, राज्य में वर्तमान में 9 खुले समुद्री पिंजरा पालन इकाइयां और 39 मीठे पानी की सजावटी मछली पालन इकाइयां संचालित की जा रही हैं। विशेष रूप से अलीबाग और श्रीवर्धन के तटीय क्षेत्रों में सजावटी मछली पालन की इकाइयों को विकसित किया गया है, जिससे स्थानीय युवाओं और मछुआरों को रोजगार के अवसर मिल रहे हैं। हालांकि रायगढ़ जिले में खुले समुद्री पिंजरा पालन के लिए आवेदन प्राप्त नहीं हुए हैं।

समुद्री कृषि गतिविधियों को व्यवस्थित और वैज्ञानिक तरीके से विकसित करने के लिए मत्स्य पालन विभाग ने सभी तटीय राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए समुद्री कृषि विकास पर मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) भी जारी की है। इसके अंतर्गत समुद्री पिंजरा पालन, समुद्री सजावटी मछली पालन और मोती पालन को बढ़ावा देने के लिए दिशानिर्देश तय किए गए हैं।

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के अंतर्गत केंद्रीय समुद्री मत्स्य अनुसंधान संस्थान (ICAR-CMFRI) ने महाराष्ट्र के तट पर पिंजरा पालन के लिए उपयुक्त पांच स्थानों की पहचान की है। इन स्थानों में कुल 1915 हेक्टेयर क्षेत्र चिन्हित किया गया है, जिसमें से केवल श्रीवर्धन क्षेत्र में ही लगभग 340 हेक्टेयर क्षेत्र उपलब्ध है।

इसके अलावा आईसीएआर-सीआईबीए द्वारा महाराष्ट्र के तटीय जिलों में खारे पानी की खाड़ियों में एशियन सीबास मछली के पिंजरा पालन का सफल प्रदर्शन किया गया है और वर्तमान में राज्य में 300 से अधिक पिंजरे संचालित हो रहे हैं। वहीं आईसीएआर-सीआईएफई राज्य में सजावटी मछली पालन के लिए प्रशिक्षण और प्रदर्शन कार्यक्रम आयोजित कर रहा है, जिससे आधुनिक तकनीकों को अपनाने में मदद मिल रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इन परियोजनाओं के माध्यम से महाराष्ट्र में मत्स्य उत्पादन में वृद्धि के साथ-साथ मछुआरों की आय में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी और तटीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।